Microsoft vs Lindows: जब एक शब्द के चक्कर में टेक दिग्गज को चुकाने पड़े 20 मिलियन डॉलर
आज माइक्रोसॉफ्ट विंडोज (Microsoft Windows) दुनिया का सबसे लोकप्रिय ऑपरेटिंग सिस्टम है, लेकिन इसके इतिहास में एक ऐसी घटना दर्ज है जहाँ कंपनी को अपने नाम के अस्तित्व को बचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने पड़े। यह विवाद जुड़ा था ‘Lindows’ नाम के एक स्टार्टअप से, जिसने माइक्रोसॉफ्ट की नींद उड़ा दी थी। अंततः इस विवाद को सुलझाने के लिए माइक्रोसॉफ्ट ने 20 मिलियन डॉलर (लगभग 170 करोड़ रुपये) का भुगतान किया।
Linux और Windows का मेल: माइकल रॉबर्टसन का सपना
2001 की शुरुआत में जब कंप्यूटर क्रांति जोर पकड़ रही थी, तब लिनक्स (Linux) एक उभरता हुआ नाम था। मगर लिनक्स की सबसे बड़ी कमी यह थी कि उस पर विंडोज के सॉफ्टवेयर नहीं चलते थे। इसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए उद्यमी माइकल रॉबर्टसन ने ‘Lindows OS’ की नींव रखी। इसके नाम से ही स्पष्ट था कि यह लिनक्स और विंडोज का मिश्रण था। कंपनी का उद्देश्य एक ऐसा सिस्टम बनाना था जहाँ यूजर्स लिनक्स की सुरक्षा और विंडोज की सुगमता का एक साथ आनंद ले सकें। इसके लिए उन्होंने ‘Wine’ तकनीक का सहारा लिया।
शानदार विजन मगर तकनीकी चुनौतियां
लिनक्स पर विंडोज ऐप चलाना आज भी पूरी तरह सटीक नहीं है, तो 2001 में यह काम और भी कठिन था। शुरुआत में Lindows ने कई दावे किए, लेकिन हकीकत में ऐप्स के चलने में काफी दिक्कतें आ रही थीं। इसके बाद कंपनी ने अपनी रणनीति बदली और ‘Click-N-Run’ (CNR) सर्विस पेश की, जिससे लिनक्स ऐप्स को इंस्टॉल करना बेहद आसान हो गया। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका की मशहूर रिटेल कंपनी वॉलमार्ट (Walmart) भी Lindows ऑपरेटिंग सिस्टम वाले कंप्यूटर बेचने लगी थी।
नाम पर छिड़ा कानूनी घमासान
Lindows की बढ़ती पैठ देख माइक्रोसॉफ्ट ने ट्रेडमार्क उल्लंघन का मुकदमा कर दिया। माइक्रोसॉफ्ट का तर्क था कि ‘Lindows’ नाम उनके ब्रांड ‘Windows’ से मिलता-जुलता है, जिससे ग्राहक भ्रमित हो सकते हैं। दूसरी ओर, Lindows की कानूनी टीम ने कोर्ट में दलील दी कि ‘Window’ एक आम तकनीकी शब्द है जिसका इस्तेमाल माइक्रोसॉफ्ट के आने से काफी पहले से हो रहा था, इसलिए इस पर किसी एक कंपनी का एकाधिकार नहीं हो सकता।
अदालत में माइक्रोसॉफ्ट की मुश्किलें
अमेरिकी कोर्ट में जज ने Lindows की दलीलों को काफी वजन दिया और माइक्रोसॉफ्ट की प्रारंभिक मांगों को खारिज कर दिया। माइक्रोसॉफ्ट के लिए यह एक बड़ा खतरा था। अगर वे अमेरिका में यह केस हार जाते, तो उनके सबसे बड़े ब्रांड ‘Windows’ की ट्रेडमार्क सुरक्षा पर भी संकट आ सकता था। हालांकि यूरोप के कुछ हिस्सों में माइक्रोसॉफ्ट को राहत मिली थी, लेकिन अमेरिका का मामला उनके लिए गले की फांस बन गया था।
करोड़ों के सौदे के साथ खत्म हुआ विवाद
Brand की सुरक्षा और लंबे अदालती झमेले से बचने के लिए माइक्रोसॉफ्ट ने 2004 में समझौता करने का निर्णय लिया। माइक्रोसॉफ्ट ने Lindows के मालिकों को 20 मिलियन डॉलर का भुगतान किया ताकि वे अपना नाम बदल लें। इस डील के बाद Lindows का नाम बदलकर ‘Linspire’ कर दिया गया। यह मामला आज भी टेक जगत में ट्रेडमार्क की लड़ाई और ब्रांड वैल्यू के महत्व का एक बड़ा उदाहरण माना जाता है।


