नेपाल से आ रहा पानी बिहार में कितना मचा सकता है कहर? 3 पॉइंट में समझें गंडक पर कितना पड़ेगा असर
1. गंडक में 3 से 4 लाख क्यूसेक तक पहुंच सकता है पानी
पड़ोसी देश नेपाल में मूसलाधार बारिश और बाढ़ के कारण बिहार की गंडक नदी में जल प्रवाह तेजी से बढ़ने की संभावना है। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार गंडक नदी में पानी का बहाव 3 लाख से 4 लाख क्यूसेक तक जा सकता है। इसी वजह से नदी तटीय इलाकों में चौकसी बढ़ा दी गई है। हालांकि, नेपाल से आने वाले पानी का चरम बहाव (पीक फ्लो) नीचे की तरफ बढ़ते समय धीमा भी पड़ सकता है। ऐसे में वास्तविक असर आगामी कुछ घंटों के जलस्तर पर निर्भर करेगा।
2. बैराज की क्षमता ज्यादा, लेकिन तेज बहाव सबसे बड़ी चिंता
वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज को करीब 8.5 लाख क्यूसेक तक का जल दबाव सहने के अनुकूल बनाया गया है। ऐसे में 3 से 4 लाख क्यूसेक पानी के आने से बैराज के ढांचे पर फिलहाल सीधे खतरे की स्थिति नहीं है। परंतु, नदी के पानी की प्रचंड रफ्तार सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। तेज धारा के कारण तटीय क्षेत्रों में दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने लोगों को नदी तटों से दूर रहने के कड़े निर्देश दिए हैं।
3. किन जिलों पर सबसे ज्यादा नजर?
नेपाल से छोड़े गए पानी का सबसे त्वरित प्रभाव गंडक के बेसिन क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिलों को विशेष निगरानी में रखा गया है। साथ ही, सीतामढ़ी और शिवहर जिलों को भी सतर्क रहने के निर्देश जारी किए गए हैं। गंडक नदी के उफान पर आने से निचले मैदानी इलाकों में जलभराव और तटबंधीय कटाव का जोखिम बढ़ सकता है, जिससे निपटने के लिए राहत कार्य शुरू कर दिए गए हैं।
बैराज के 36 गेट क्यों खोले गए?
नेपाल के जल ग्रहण क्षेत्रों से जलस्तर में अचानक हुई बढ़ोतरी के दबाव को संतुलित करने के लिए वाल्मीकिनगर बैराज के सभी 36 फाटकों (गेट्स) को खोल दिया गया है। इसका प्राथमिक उद्देश्य पानी की अतिरिक्त मात्रा को सुरक्षित रूप से आगे की ओर प्रवाहित करना है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी विशेषज्ञों का एक दल मौके पर तैनात है और सभी संबंधित जिला प्रशासनों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
नेपाल के पानी से बिहार में अभी कितना खतरा?
वर्तमान परिस्थितियों में इसे तुरंत किसी भीषण जलप्रलय की संज्ञा देना उचित नहीं होगा। नेपाल से आने वाला पानी कई चरणों और नदी क्षेत्रों से गुजरता हुआ आगे बढ़ता है। बाढ़ के वास्तविक खतरे का निर्धारण पानी की गति, कुल मात्रा और बैराज प्रबंधन पर टिका हुआ है। इसके बावजूद सुरक्षात्मक उपायों में कोई ढिलाई नहीं बरती जा रही है, और अगले 24 से 48 घंटे गंडक नदी से सटे इलाकों के लिए अत्यंत संवेदनशील माने जा रहे हैं।


