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September 16, 2026

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Satya ke saath !! sadev !!

देव स्नान पूर्णिमा के अवसर पर भगवान जगन्नाथ,भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को सरायकेला जगन्नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ कराया गया स्नान

सरायकेला देव स्नान पूर्णिमा के अवसर पर भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को सरायकेला जगन्नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी ब्रह्मानंद महापात्र, पंडित सानु आचार्य एवं अन्य सहयोगी द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ स्नान कराया गया। शनिवार को सुबह से ही देव स्नान पूर्णिमा दर्शन के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं का काफी गहमागहमी देखा गया जिसमें ज्यादातर महिलाओं का भीड़ था, जो आज इस पावन अवसर पर अपने आराध्य देव के दर्शन करने आए थे। जगन्नाथ मंदिर में श्री जगन्नाथ सेवा समिति द्वारा भजन संध्या एवं महाप्रसाद वितरण किया गया।

ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि पर भगवान जगन्नाथ का सहस्त्रधारा स्नान होता है,इसे देव स्नान भी कहते हैं।भगवान जगन्नाथ,भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा जी को सुगंधित जल से स्नान कराया जाता है।सरायकेला की प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की देव स्नान पूर्णिमा या ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि महत्वपूर्ण है।स्नान के कारण महाप्रभु श्री जगन्नाथ भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा बीमार हो जाते हैं जिसके कारण 14 दिनों तक अज्ञातवास में चले जाते हैं एवं अपने भक्तों को दर्शन नहीं देते हैं।भगवान जगन्नाथ के मंदिर के कपाट भी बंद रहता है एवं पुजा अर्चना भी नहीं किया जाता है।भगवान जगन्नाथ,उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा जी का अन्दर कमरे में ही 14 दिनों तक उपचार होता है, उन्हें कई प्रकार की जड़ी-बूटियां दी जाती हैं।

मान्यताओं के अनुसार,जब पहली बार भगवान जगन्नाथ ज्येष्ठ पूर्णिमा को स्नान किए थे तो बीमार हो गए थे,तब उनका उपचार हुआ था और उन्होंने 15वें दिन भक्तों को दर्शन दिए थे।इसके बाद से हर साल ज्येष्ठ पूर्णिमा को भगवान जगन्नाथ देव स्नान करते हैं और 14 दिनों तक बीमार होते हैं।भगवान जगन्नाथ अपने भाई बहन के साथ 14 दिन तक मंदिर में स्थित अलग कमरे में या अणसर घर में रहते हैं।आषाढ़ कृष्ण दशमी तिथि को मंदिर में ””चका बीजे”” नीति रस्म होती है,जो भगवान जगन्नाथ के सेहत में सुधार का प्रतीक है।इस साल चका बीजे नीति रस्म 1 जुलाई सोमवार को होगी।उसके बाद 15वें दिन मंदिर के कपाट खुलेंगे और भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों को दर्शन देंगे,उस दिन नेत्र उत्सव एवं नव यौवन वेश में अपने भक्तों को दर्शन देंगे।07 जुलाई को भगवान जगन्नाथ,भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपने मौसी गुंडिचा मंदिर के लिए निकलते हैं जो रथयात्रा के रूप में प्रसिद्ध है।15वें दिन आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा तिथि को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा पूर्ण रूप से स्वस्थ हो जाते हैं और उस दिन मंदिर में नेत्र उत्सव एवं नव यौवन वेश होता हैं इसमें भगवान जगन्नाथ अपने भाई और बहन के साथ भक्तों को दर्शन देते हैं। संयोग से इस साल नेत्र उत्सव,नव यौवन एवं गुंडीचा रथयात्रा 07 जुलाई (रविवार) को होगा।

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