सरायकेला के मारवाड़ी धर्मशाला में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के छठवें दिन आचार्य वेदानंद शास्त्री जी महाराज ने कहा कुसंग का परिणाम हमेशा भयंकर होता है
सरायकेला युवा मंच अखिल भारत मारवाड़ी महिला समिति अखिल भारतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त तत्वाधान में मारवाड़ी धर्मशाला में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा का छठवें दिन आचार्य वेदानंद शास्त्री जी महाराज ने कहा कुसंग का परिणाम भयंकर होता है। मंथरा दासी के कहने पर माता कैकेयी ने महाराज दशरथ से अपने दो वरदान मांगे। जिन्हें सुनकर महाराज दशरथ व्याकुल हो गए। महाराज दशरथ कैकेयी से अपना वरदान बदलने को कहते हैं, परंतु कैकेयी कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है। राजा दशरथ पूरी रात राम-राम करते रहे और रोते रहे। सुबह अयोध्यावासी महाराज के दर्शन करने महल पहुंचे जाते हैं। जब राम पिता महाराज दशरथ की दशा देखते हैं तो भगवान श्रीराम भी रो पड़ते हैं और माता कैकेयी से कहते हैं कि वह बेटा भाग्यशाली होता है जो अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करता है।

इस मौके पर रामकथावाचक शास्त्री जी ने अपने मुखारविंद से केवट की परम भक्ति का वर्णन किया। केवट ने राम-लक्ष्मण और सीता माता को गंगा पार लेकर गए केवट को निर्मल भक्ति का वरदान देकर प्रभु श्रीराम ने गंगा किनारे पहुंचकर गंगा मैया की पूजा अर्चना की। उसके बाद प्रभु श्रीराम प्रयागराज पहुंचे,और ऋषि भारद्वाज से भेंट की। एक रात ऋषि भारद्वाज के आश्रम में विश्राम करने के उपरांत अगले दिन प्रातः काल आगे बढ़े और महर्षि बाल्मीकि के आश्रम में पहुंचने पर ऋषियों ने प्रभु की सुंदर स्तुति गाई।उसके बाद प्रभु श्रीराम ने महर्षि बाल्मीकि से स्थान पूछकर चित्रकूट में निवास किया। दूसरी तरफ सुमंत वापस अयोध्या पहुंचे और राजा दशरथ ने जब सुना कि राम वापस नहीं आए, तो दशरथ ने राम के वियोग में प्राण त्याग दिए। उधर भरत अपने ननिहाल से वापस आए और पिता का अंतिम संस्कार किया गया। उसके बाद बैठी राजसभा में भरत जी ने निर्णय लिया कि वन में जाकर श्रीराम को राजसत्ता सौंप दी जाए, फिर भरत जी सभी माताओं और अयोध्या वासियों को साथ लेकर चित्रकूट में पधारे और राम जी से भेंट हुई। भरत जी ने प्रभु श्री राम से राजगद्दी संभालने का आग्रह किया। जिस पर श्री राम ने राजसत्ता अस्वीकार कर दी ओर श्रीराम ने भरत को अपनी चरणपादुका दीं। भरत चरणपादुका साथ लेकर वापस अवधपुरी आए और राम जी की चरण पादुकाओं से आज्ञा लेकर राजसत्ता का कार्य संभाला था।

छठवें दिन दिन कथा के मुख्य यजमान सीताराम सेक्सरिया नगर पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी, युवा मंच के अध्यक्ष आकाश अग्रवाल महिला समिति की अध्यक्षा रेखा सेक्सरिया रविंद्र अग्रवाल बबीता अग्रवाल बिमल चौधरी सविता चौधरी इंद्रा अग्रवाल सत्यनारायण अग्रवाल सरोज सेक्सरिया केदारनाथ अग्रवाल गौर गोविंद शाह सुषमा चौधरी कविता अग्रवाल एवं काफी संख्या में श्रोतागण उपस्थित थे।
