प्राइमरी स्कूल में घंटा आधारित शिक्षक सर्वे में ओड़िया भाषा की अपेक्षा तथा पूर्वी सिंहभूम में मात्र 7 शिक्षक का पद स्वीकृत किए जाने का विरोध
पूर्व सिहभुम, पश्चिम सिहभुम, सरायकेला खरसावां जिले के प्राइमरी स्कूल में घंटा आधारित (माचेट) शिक्षकों सर्वे में ओड़िया भाषा की अपेक्षा तथा पूर्व सिहभुम में मात्र 7 शिक्षक का पद स्वीकृति किए जाने का विरोध प्रारंभ हो गया है भाषाई सर्वे को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है झारखंड के पुरानी भाषाओं में से एक ओड़िया भाषा को दर किनार करने के विरोध में सिहभुम जिले के ओड़िया समाज एकजुट होने लगा है। इसे लेकर सिंहभूम ओड़िया अस्मिता सम्मेलनों का गठन किया गया। इसका कोल्हान प्रमंडल क्षेत्र का संयोजक पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ दिनेश सारंगी को बनाया गया है ।

साकची स्थित उत्कल एसीसिएशन सभागार में आयोजित की गई अस्मिता की रक्षा तथा भाषा को अपनी पहचान दिलाने के लिए एवं स्कूल में ओड़िया शिक्षकों की बहाली के लिए रथ यात्रा के बाद कोल्हान के तीनों जिला के सभी जिला मुख्यालय में धरना प्रदर्शन किया जाएगा बैठक में वक्ताओं ने कहा कि जल्दी ही स्कूलों में कराए गए माचेट शिक्षकों के सर्वे में विसंगति को लेकर मुख्यमंत्री से एक प्रतिनिधि मंडल मिलेगा और ओड़िया भाषा अधिकार की बात रखेगा। बैठक में चर्चा किया गया कि आजादी से पहले सिंहभूम क्षेत्र में ओड़िया स्कूल ही थी 1970 से पहले 350 ओड़िया स्कूल की हिंदी स्कूल में परिणत कर दिया गया इन स्कूलों में एक भी ओड़िया भाषा के यूनिट को नहीं रखा गया।

माचेट शिक्षकों को नियुक्ति के मामले में एक उम्मीद जगी थी लेकिन सर्वे को अड़चनों के कारण इसमें ओड़िया शिक्षकों के पद के सृजन की संख्या नगण्य है। इस कारण इसका विरोध करना अब मजबूरी है अब झारखंड सरकार में अगर ऐसी स्थिति रही तो ओड़िया शिक्षण संस्थाओं एवं सांस्कृतिक विरासत को बचाना मुश्किल हो जाएगा। डॉ दिनेश सारंगी ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि सिंहभूम ओड़िया अस्मिता रक्षा भाषा शिक्षा एवं सांस्कृतिक सम्मेलनों के द्वारा वर्तमान समय में ओड़िया समाज के बुद्धिजीवी व शिक्षाविद तथा भाषा प्रेमी अगर नहीं चेते तो भविष्य में अपनी भाषा बचाना मुश्किल होगी।

वर्तमान राज्य सरकार के स्तर से स्कूल में मातृभाषा में पढ़ाई का संकल्प लिया गया है इसकी प्रक्रिया प्रारंभ की गई है शिक्षकों के नियुक्ति को लेकर सर्वे भी हुआ लेकिन इसमें कोई तरह की विसगतिया है। इसमें सुधार आवश्यक है और सर्वे को फिर से कराया जाने की आवश्यकता है। बैठक में मुख्य रूप से खरसावां के राजा गीपाल नारायण सिंह देव, अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अशोक सारंगी, सरायकेला नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष मीनाक्षी पटनायक, अधिवक्ता आर एन सतपती, अधिवक्ता निर्मल आचार्य, सुमंत मोहंती, सरोज प्रधान, डॉ श्रीधर प्रधान, तरुण कुमार मोहंती, तपन पटनायक, जयराम दास, समेत तीनों जिला के विभिन्न ओड़िया समाज संस्थान के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
