Ranchi Liquor Factory Raid: रांची के ओरमांझी में अवैध शराब प्लांट पर बड़ा एक्शन, आरजेडी नेता और बिहार के पूर्व MLC सुबोध राय सहित 3 अरेस्ट
Ranchi Liquor Factory Raid: झारखंड की राजधानी रांची में मंगलवार की देर रात एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस और आबकारी विभाग (उत्पाद विभाग) की संयुक्त टीम ने एक शराब फैक्ट्री पर छापा मारा। इस कार्रवाई के दौरान मौके से भारी मात्रा में अवैध विदेशी शराब जब्त की गई है। इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और बिहार के पूर्व विधान पार्षद (MLC) सुबोध कुमार समेत तीन लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया और कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद बुधवार शाम को उन्हें जेल भेज दिया गया।
रांची में शराब फैक्ट्री पर छापा, राजद नेता और बिहार के पूर्व एमएलसी सुबोध समेत तीन गिरफ्तार
रांची के ओरमांझी इलाके में स्थित ‘तरंगनी लिकर्स प्राइवेट लिमिटेड’ नाम के प्लांट में मंगलवार की रात जिला पुलिस और उत्पाद विभाग की टीम ने अचानक दबिश दी। बताया जा रहा है कि यह प्लांट आरजेडी नेता सुबोध राय का है। छापेमारी के दौरान टीम ने सुबोध राय, उनके ड्राइवर देवेंद्र भगत और प्लांट के एक कर्मचारी रविकांत राय को रंगे हाथों धर दबोचा।
आरोप है कि इस फैक्ट्री में तैयार होने वाली शराब पर देश के अन्य मशहूर ब्रांड्स के नकली लेबल चिपकाए जा रहे थे और फिर इसे आधी कीमतों पर बाजार में अवैध रूप से सप्लाई किया जा रहा था। सहायक उत्पाद आयुक्त उमाशंकर सिंह के नेतृत्व में यह पूरी कार्रवाई की गई, जो देर रात 12 बजे शुरू होकर अगले दिन सुबह 6 बजे तक जारी रही। पकड़े गए तीनों आरोपियों को बुधवार शाम बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार (जेल) भेज दिया गया।
तीन अलग-अलग ब्रांड की अवैध शराब बना रहे थे
जांच में यह बात सामने आई है कि इस प्लांट के भीतर चोरी-छिपे तीन नामी ब्रांड्स की नकली और अवैध शराब तैयार की जा रही थी। इनमें ‘8 PM’ और ‘After Dark’ जैसे ब्रांड्स शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन बोतलों पर उत्तर प्रदेश और दिल्ली के फर्जी लेबल लगाए जा रहे थे ताकि इन्हें दूसरे राज्यों में खपाया जा सके। जब्त बोतलों पर ‘For Sale Only in Uttar Pradesh’ प्रिंट था। आपको बता दें कि करीब दो साल पहले भी उत्पाद विभाग ने इसी प्लांट पर कार्रवाई करते हुए इसे पूरी तरह सील कर दिया था।
छापेमारी में जब्त सामग्री
उत्पाद विभाग की टीम ने प्लांट से निम्नलिखित अवैध स्टॉक बरामद किया है:
- किंगफिशर स्ट्रॉन्ग प्रीमियम बीयर: कुल 70 पेटियां (हर पेटी में 24 कैन्स)।
- आफ्टर डार्क ब्लू: कुल 218 पेटियां (हर पेटी में 48 बोतलें), जिन पर उत्तर प्रदेश में बिक्री का फर्जी मार्क था।
- 8 PM व्हिस्की: कुल 7 पेटियां (हर पेटी में 48 बोतलें), इस पर भी यूपी का लेबल लगा था।
- रॉयल्सन गोल्ड व्हिस्की: कुल 78 पेटियां, जिन पर दिल्ली में बिक्री का फर्जी मार्क लगा हुआ था।
इन गड़बड़ियों का है आरोप
फैक्ट्री प्रबंधन और आरोपियों पर मुख्य रूप से ये गंभीर आरोप लगाए गए हैं:
- लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन कर विदेशी शराब का अवैध स्टॉक जमा करना।
- तैयार शराब की अन्य राज्यों में अवैध तस्करी और सप्लाय करने की साजिश।
- सरकारी अनुमति प्राप्त ब्रांड्स की आड़ में अन्य मिलते-जुलते नकली ब्रांड्स का अवैध निर्माण और स्टोरेज।
- फर्जी दस्तावेज और नकली मार्का तैयार कर परिवहन करना।
- इस अवैध कारोबार के जरिए राज्य सरकार के राजस्व (टैक्स) को भारी चपत लगाना।
उत्पाद विभाग ने तैनात किया था बॉन्ड अफसर, फिर भी बन रही थी अवैध शराब
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद अब आबकारी विभाग की अपनी कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नियम के मुताबिक, ऐसे प्लांट में उत्पादन की निगरानी के लिए उत्पाद विभाग की तरफ से एक ‘बॉन्ड ऑफिसर’ तैनात रहता है, जिसकी मौजूदगी में ही सारे काम होते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि अधिकारी की तैनाती के बावजूद इतने बड़े पैमाने पर फर्जी लेबलिंग और अवैध शराब की तस्करी कैसे हो रही थी।
वहीं, आरोपी सुबोध कुमार का कहना है कि प्लांट के सारे काम बॉन्ड अफसर की देखरेख में ही होते थे। जब वह अधिकारी दूसरे क्षेत्रों के कामों में व्यस्त रहते थे, तब कथित तौर पर शराब पर अलग-अलग राज्यों के फर्जी टैग लगाकर उन्हें बिहार, यूपी और दिल्ली भेजने का खेल खेला जाता था।
