भारत लाया गया दाऊद का गुर्गा सलीम डोला, इस्तांबुल में गिरफ्तारी के बाद किया गया डिपोर्ट
मुख्य समाचार नशीले पदार्थों के कुख्यात तस्कर और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के सहयोगी सलीम डोला को भारत वापस लाया गया है। तुर्की के इस्तांबुल में पकड़े जाने के बाद उसे भारतीय एजेंसियों के हवाले कर दिया गया। डोला को डी-कंपनी के नार्को-सिंडिकेट का एक प्रमुख चेहरा माना जाता है।
खुफिया एजेंसियों की बड़ी कामयाबी सलीम डोला की वापसी भारतीय खुफिया विभाग और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के एक साझा ऑपरेशन का परिणाम है। उसे इस्तांबुल से सीधा दिल्ली लाया गया। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, डोला दाऊद के नशीले पदार्थों के साम्राज्य के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। फिलहाल, दिल्ली में जांच एजेंसियां उससे गहन पूछताछ कर रही हैं ताकि अंडरवर्ल्ड के नेटवर्क का और खुलासा हो सके।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्ट सलीम डोला की गिरफ्तारी की खबर सबसे पहले तुर्किये के मीडिया हाउस ‘सीएनएन’ (CNN Türk) ने दी थी। रिपोर्ट के अनुसार, डोला इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस की लिस्ट में शामिल था और लंबे समय से तुर्की के अधिकारियों की रडार पर था।

ऐसे पकड़ा गया डोला ड्रग्स तस्करी के कई मामलों में वांछित सलीम डोला इस्तांबुल के बेयलिकडुजू (Beylikdüzü) इलाके में एक गुप्त ठिकाने पर अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था। सुरक्षा एजेंसियों ने तकनीकी निगरानी और फिजिकल सर्विलांस के जरिए उसके सटीक स्थान का पता लगाया। पुख्ता जानकारी मिलने के बाद एक विशेष अभियान चलाकर उसे हिरासत में ले लिया गया।
NDPS एक्ट के तहत दर्ज हैं मामले इंटरपोल द्वारा जारी रेड नोटिस में स्पष्ट है कि सलीम डोला पर भारत में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत गंभीर आरोप हैं। भारत में यह सख्त कानून नशीली दवाओं के अवैध व्यापार, निर्माण, बिक्री और खपत को रोकने के लिए बनाया गया है।
सजा का प्रावधान कानूनी जानकारों के मुताबिक, NDPS कानून की धाराओं के तहत अपराध सिद्ध होने पर सलीम डोला को कम से कम 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा भुगतनी पड़ सकती है। भारत आने के बाद अब उस पर अदालती कार्यवाही शुरू की जाएगी।
