शुभेंदु अधिकारी का अवैध निर्माण पर एक्शन, पश्चिम बंगाल में ऑपरेशन बुलडोजर शुरू
मुख्य बातें
- अवैध इमारतों को ढहाने के लिए पूरे क्षेत्र को किले में बदला गया।
- कारखाने में आग लगने के बाद सामने आई अवैध निर्माण की सच्चाई।
- जांच रिपोर्ट में अधिकारियों की बड़ी लापरवाही और नियमों के उल्लंघन का खुलासा।
कोलकाता: उत्तर प्रदेश की तर्ज पर अब पश्चिम बंगाल में भी प्रशासन का सख्त रुख देखने को मिल रहा है। राज्य में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्देश के बाद अवैध निर्माणों के खिलाफ ‘ऑपरेशन बुलडोजर’ की शुरुआत हो चुकी है। हाल ही में तिलजला क्षेत्र में अवैध रूप से बनी इमारतों को गिराने की प्रक्रिया शुरू की गई। भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि गैर-कानूनी निर्माणों के प्रति प्रशासन ‘जीरो टॉलरेंस’ (शून्य सहनशीलता) की नीति अपनाएगा। यह निर्णय तिलजला के एक चमड़ा गोदाम में हुई भीषण दुर्घटना के बाद लिया गया है, जिसमें दो लोगों की जान चली गई थी।

पूरे इलाके को छावनी में बदला गया जैसे ही कोलकाता नगर निगम (KMC) और केएमडीए (KMDA) की टीम बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंची, कुछ स्थानीय लोगों ने विरोध करने का प्रयास किया। हालांकि, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल, रैफ (RAF) और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासन ने पूरे इलाके में बैरिकेडिंग कर उसे छावनी में तब्दील कर दिया और अवैध ढांचों को ढहाने का काम निरंतर जारी रहा।
आग की घटना के बाद खुली अवैध निर्माण की पोल अवैध निर्माण के खिलाफ यह सख्त कार्रवाई तब शुरू हुई जब मंगलवार को तिलजला रोड स्थित एक चार मंजिला इमारत के चमड़ा गोदाम में आग लग गई थी। इस दर्दनाक हादसे में दो मजदूरों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। इस घटना ने प्रशासन की नींद उड़ा दी और राज्य सरकार ने तुरंत उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए।
जांच में सामने आयी बड़ी लापरवाही जांच दल द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार, जिस भवन में आग लगी थी, वह बिना किसी स्वीकृत नक्शे या बिल्डिंग प्लान के बनाया गया था। साथ ही, वहाँ सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी की गई थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री ने 24 घंटे के भीतर सभी अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का कड़ा निर्देश दिया।
