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September 15, 2026

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डोमिसाइल आंदोलन के महानायकों का बलिदान आज भी अधूरा : शिल्पी नेहा तिर्की

रांची : झारखंड राज्य की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि झारखंड के लिए 1932 के खतियान आधारित स्थानीय नीति आंदोलन को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि 24 जुलाई 2002 को इसी स्थान पर संतोष कुंकल, विनय तिग्गा और कैलाश कुजूर ने अपनी शहादत दी थी। यह केवल एक आंदोलन नहीं था, बल्कि राज्य की अस्मिता और अधिकारों के लिए दिया गया बलिदान था। इस आंदोलन से उनका भावनात्मक जुड़ाव भी रहा है।

मौका था डोमिसाइल आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि देने का। इसके लिए गुरुवार को रांची के मेकॉन स्थित त्रिमूर्ति चौक और शहीद स्थल पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गयी थी। कार्यक्रम का आयोजन डोमिसाइल शहीद स्मारक समिति ने किया था।शिल्पी ने कहा कि डोमिसाइल आंदोलन के महानायकों का बलिदान आज भी अधूरा है। राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में 1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति का प्रस्ताव विधानसभा से पारित कर राजभवन भेजा, लेकिन अब तक राजभवन की ओर से इस पर कोई गंभीर पहल नहीं हुई है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन लोगों ने अपनी जान देकर झारखंडवासियों के अधिकारों की लड़ाई लड़ी, उनके परिजनों को आज भी न्याय नहीं मिला।

सभा में मंत्री ने आश्वस्त किया कि डोमिसाइल आंदोलन में शहीद हुए युवाओं को शहीद का दर्जा देने तथा उनके परिजनों को सरकारी सुविधाएं प्रदान करने की मांग को वे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष रखेंगी। उन्होंने भरोसा जताया कि संवेदनशील सरकार इस मांग को गंभीरता से लेगी और उचित निर्णय लेगी।ये रहे मौजूदइस मौके पर शहीद स्मारक समिति के सदस्य संजय तिग्गा, बेलस तिर्की, शिवा कच्छप, जगदीश लोहरा, दीपू सिन्हा और जलील अंसारी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने मिलकर आंदोलन के शहीदों को नमन किया और उनके सपनों को पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

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