बंगाल में मुस्लिम वोटरों से अधिक कटे हिंदू वोटरों के नाम, SIR पर तृणमूल कांग्रेस का नया खुलासा
बंगाल में हिंदुओं की संख्या मुस्लिमों से अधिक, टीएमसी ने ‘SIR’ रिपोर्ट के हवाले से किया दावा
पश्चिम बंगाल की राजनीति में जनसंख्या और धार्मिक आंकड़ों को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने एक कथित स्टेट इंटेलिजेंस रिपोर्ट (SIR) का हवाला देते हुए दावा किया है कि राज्य में हिंदुओं की जनसंख्या वृद्धि दर मुस्लिमों की तुलना में अधिक है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तन के दावों में कोई सच्चाई नहीं है और आंकड़े हकीकत बयां कर रहे हैं।

विपक्ष के ‘जनसांख्यिकीय असंतुलन’ के नैरेटिव पर पलटवार
टीएमसी नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए कहा कि लंबे समय से बंगाल में मुस्लिम आबादी के असंतुलित तरीके से बढ़ने का डर दिखाया जा रहा था। हालांकि, पार्टी के अनुसार, हालिया रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि बहुसंख्यक समाज की संख्या और वृद्धि दर स्थिर और मजबूत है। तृणमूल का तर्क है कि आंकड़ों के इस खुलासे से ध्रुवीकरण की राजनीति करने वालों के मंसूबों पर पानी फिर जाएगा।
चुनाव से पहले आंकड़ों की जंग तेज
राज्य में होने वाले आगामी चुनावों से ठीक पहले इस तरह के दावों ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। टीएमसी का मानना है कि यह रिपोर्ट विकास और सामाजिक सद्भाव के उनके एजेंडे को मजबूती देगी। पार्टी का कहना है कि वे किसी धर्म विशेष के नहीं, बल्कि सभी वर्गों के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषक इसे वोट बैंक को साधने और विपक्ष के तुष्टीकरण के आरोपों को काउंटर करने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।
सटीक डेटा और पारदर्शिता की मांग
लेख में उल्लेख है कि टीएमसी ने इन आंकड़ों को सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि बंगाल की पहचान उसकी विविधता और समावेशी संस्कृति में है। पार्टी ने प्रशासन से आग्रह किया है कि आधिकारिक डेटा को पारदर्शी तरीके से सामने रखा जाए ताकि भ्रामक सूचनाओं पर लगाम लग सके। फिलहाल, इस रिपोर्ट और दावों ने बंगाल के राजनीतिक गलियारों में एक नई हलचल पैदा कर दी है।
