डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को दिखाया ‘ईसा मसीह’ जैसा; पोप लियो XIV को बताया ‘क्राइम पर सुस्त’ और ‘फ्लॉप’
डोनाल्ड ट्रंप ने साझा की ‘ईसा मसीह’ वाली AI फोटो; पोप लियो XIV पर साधा तीखा निशाना
मुख्य अंश: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वेटिकन के धर्मगुरु पोप लियो XIV के बीच तनातनी चरम पर पहुंच गई है। ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया पर अपनी एक ऐसी तस्वीर साझा की है जिसमें वे ईसा मसीह (Jesus Christ) जैसे दिखाई दे रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने पोप की नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें अपराध के प्रति नरम और अंतरराष्ट्रीय मामलों में विफल करार दिया है।
खुद को ईसा मसीह के रूप में किया पेश डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा निर्मित एक तस्वीर पोस्ट की। इस चित्र में ट्रंप को लंबी पोशाक पहने हुए एक बीमार व्यक्ति का उपचार करते हुए दिखाया गया है, जो सीधे तौर पर बाइबिल के चमत्कारों की याद दिलाता है। तस्वीर की पृष्ठभूमि में अमेरिकी ध्वज, सैन्य विमान और स्वर्गदूतों की आकृतियाँ भी नजर आ रही हैं, जिससे एक नया धार्मिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
पोप की वैश्विक नीतियों पर उठाए सवाल ट्रंप ने पोप लियो XIV को विदेशी मामलों में ‘अक्षम’ बताया। उनका दावा है कि पोप को अपराध रोकने और सुरक्षा सुनिश्चित करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। ट्रंप ने यहाँ तक कह दिया कि यदि वे सत्ता में न होते, तो लियो XIV कभी पोप नहीं बन पाते। उनके अनुसार, चर्च ने एक अमेरिकी को इस पद के लिए इसलिए चुना ताकि वे ट्रंप प्रशासन के साथ बेहतर तालमेल बिठा सकें, लेकिन वे अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे हैं।
ईरान और वेनेजुएला के मुद्दे पर टकराव तनाव का मुख्य कारण ईरान और वेनेजुएला जैसे देशों के प्रति ट्रंप का कड़ा रुख है, जिसकी पोप ने आलोचना की थी। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वे एक ऐसा धर्मगुरु नहीं चाहते जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम का समर्थन करे या वेनेजुएला के प्रति अमेरिकी कार्रवाई को गलत ठहराए। ट्रंप का कहना है कि वे केवल वही कर रहे हैं जिसके लिए अमेरिकी जनता ने उन्हें भारी बहुमत से चुना है।
कोविड काल और धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा अपनी पोस्ट में ट्रंप ने आरोप लगाया कि कोविड-19 महामारी के दौरान जब पादरियों को प्रार्थना सभाएं आयोजित करने के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, तब पोप चुप रहे। उन्होंने पोप के भाई लुईस की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे ‘MAGA’ विचारधारा के समर्थक हैं, जबकि पोप लियो XIV जमीनी हकीकत से दूर हैं।
राजनीति और धर्म का विवाद ट्रंप ने पोप को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें राजनीति छोड़कर केवल धर्म पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने पोप की वामपंथी नेताओं और सलाहकारों से बढ़ती नजदीकी को चर्च के लिए नुकसानदेह बताया। ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए साफ तौर पर कहा कि उन्हें अपराध और परमाणु हथियारों के प्रति उदार नजरिया रखने वाला पोप पसंद नहीं है। यह विवाद तब और बढ़ गया जब कुछ शीर्ष कार्डिनल्स ने भी ट्रंप की नीतियों को अनैतिक बताया, जबकि पोप लगातार शांति और कूटनीति की अपील कर रहे हैं।

