मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS राफेल पेराल्टा ने रोका ईरानी जहाज, US की समुद्री नाकेबंदी से बढ़ी टेंशन
USS राफेल पेराल्टा की बड़ी कार्रवाई (Action by USS Rafael Peralta)
अमेरिकी नौसेना के शक्तिशाली गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर, USS राफेल पेराल्टा (DDG 115) ने समुद्र में एक ईरानी झंडे वाले जहाज को इंटरसेप्ट किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह कार्रवाई 24 अप्रैल को की गई। बताया जा रहा है कि अमेरिकी निगरानी तंत्र इस जहाज पर लगातार नजर रखे हुए था। जब इस जहाज ने ईरानी बंदरगाह की ओर जाने का प्रयास किया, तो अमेरिकी युद्धपोत ने इसे बीच रास्ते में ही रोक दिया।
अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी हुई और सख्त (Strict Maritime Blockade)
यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ लागू की गई सख्त ‘मैरीटाइम ब्लॉकेड’ (समुद्री नाकेबंदी) का हिस्सा है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति के निर्देश पर यह घेराबंदी और मजबूत की गई है। इस नाकेबंदी का मुख्य उद्देश्य उन सभी जहाजों को रोकना है जो ईरान के साथ व्यापार या तेल की आवाजाही में संलिप्त हैं। अमेरिका का दावा है कि वह अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत अपनी सुरक्षा और हितों के लिए यह कदम उठा रहा है।

अन्य संदिग्ध जहाजों पर भी कार्रवाई (Action on Other Vessels)
USS राफेल पेराल्टा की इस कार्रवाई के अलावा, हाल के दिनों में अमेरिका ने कई और जहाजों को भी निशाना बनाया है। हाल ही में ‘M/V टॉस्का’ नामक जहाज को अमेरिकी मरीन द्वारा जब्त किया गया था। इसके अलावा, करीब 20 लाख बैरल तेल ले जा रहे टैंकर ‘टिफ़नी’ और एक अन्य बेनाम जहाज ‘मैजेस्टिक एक्स’ को भी अमेरिकी सेना ने अपनी हिरासत में ले लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक 30 से अधिक जहाजों ने अमेरिकी चेतावनी के बाद अपना रास्ता बदल लिया है।
ईरान को सीधी चेतावनी (Warning to Iran)
अमेरिकी रक्षा मंत्री (Secretary of War) पीट हेगसेथ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि ईरान को या तो परमाणु समझौते पर नई शर्तों के साथ आना होगा या फिर इस सख्त आर्थिक और समुद्री घेराबंदी का सामना करना होगा। अमेरिका का कहना है कि उनकी नौसेना न केवल नए जहाजों पर नजर रख रही है, बल्कि उन जहाजों (Dark Fleet) को भी ट्रैक कर रही है जिन्होंने पहले नियमों का उल्लंघन किया है।
क्षेत्र में बढ़ा युद्ध का खतरा (Geopolitical Impact)
इस ताजा घटनाक्रम के बाद मध्य-पूर्व (Middle East) में तनाव चरम पर पहुंच गया है। जहाँ एक ओर अमेरिका अपनी नाकेबंदी को सही ठहरा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे क्षेत्रीय शांति के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के सीधे टकराव से वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापारिक मार्गों पर बुरा असर पड़ सकता है।
