बंगाल में 12.9 लाख वोटरों की धड़कन तेज, वोट डालेंगे या नहीं आज आयेगी अंतिम लिस्ट
बंगाल चुनाव की अहम हलचल पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से ठीक पहले एक बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य के 7 जिलों के लगभग 142 विधानसभा क्षेत्रों में न्यायिक प्रक्रिया के चलते करीब 12.9 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं। अब सबकी नजरें एसआईआर (SIR) ट्रिब्यूनल पर टिकी हैं। ट्रिब्यूनल से हरी झंडी मिलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इनमें से कितने लोगों को मतदान का अधिकार वापस मिलेगा।
खास बातें
- पहले चरण में ट्रिब्यूनल ने मात्र 139 वोटरों को दोबारा लिस्ट में जगह दी।
- मतदान से 48 घंटे पहले जारी होगी सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट।
- मेटियाब्रुज क्षेत्र में सबसे ज्यादा मतदाताओं के नाम हटाए गए।

ट्रिब्यूनल के फैसले का इंतजार सोमवार का दिन उन लाखों मतदाताओं के लिए निर्णायक है जिनके नाम डिलीट कर दिए गए हैं। चुनाव आयोग के नियमों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन नामों को ट्रिब्यूनल से मंजूरी मिल जाएगी, उन्हें वोटिंग से 48 घंटे पहले पूरक (Supplementary) मतदाता सूची में जोड़ दिया जाएगा। इससे उन्हें बुधवार को होने वाले दूसरे चरण के मतदान में हिस्सा लेने का अवसर मिलेगा।
पहले चरण का अनुभव रहा निराशाजनक निर्वाचन प्रक्रिया के पहले चरण में भी बड़ी तादाद में नाम हटाए गए थे। हालांकि, ट्रिब्यूनल की समीक्षा के बाद केवल 139 मतदाताओं के नाम ही बहाल किए जा सके, जबकि 8 आवेदनों को खारिज कर दिया गया। इस कम संख्या के कारण प्रभावित लोगों में काफी चिंता और मायूसी देखी जा रही है। हालांकि, उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार समय अधिक मिलने के कारण बहाल होने वाले नामों की संख्या बढ़ सकती है।
वोटर लिस्ट से जुड़े आंकड़े (जिलावार) मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के कुछ प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:
- कोलकाता: 67,632 नाम हटाए गए
- उत्तर 24 परगना: 3.3 लाख नाम हटाए गए
- दक्षिण 24 परगना: 2.2 लाख नाम हटाए गए
- पूर्व बर्धमान: 2.09 लाख नाम हटाए गए
- नदिया: 2.08 लाख नाम हटाए गए
- कोलकाता पोर्ट: 13,395 नाम हटाए गए
- चौरंगी: 10,424 नाम हटाए गए
मेटियाब्रुज में सबसे बड़ी कटौती अगर विधानसभा वार बात करें, तो दक्षिण 24 परगना का मेटियाब्रुज इलाका सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, जहाँ 39,579 वोटरों के नाम काटे गए हैं। इसके अलावा राजारहाट-न्यू टाउन (24,132), राणाघाट उत्तर-पूर्व (20,796), और गायघाटा (19,638) जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं। इस स्थिति को लेकर स्थानीय मतदाताओं में संशय बना हुआ है कि वे अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग कर पाएंगे या नहीं।
