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September 17, 2026

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झारखंड में बजट की 90% राशि खर्च होने का अनुमान

झारखंड सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष (2023-24) में बजट की 90 प्रतिशत राशि खर्च करने का अनुमान किया है. साथ ही कुल बजट में निहित राशि में से 12005.00 करोड़ रुपये के करीब सरेंडर होने का अनुमान लगाया गया है. चालू वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन 31 मार्च को लगभग 1.04 लाख करोड़ रुपये की कुल निकासी अनुमानित है. वहीं, करीब 450 आवंटन आदेश जारी कर 250 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी संभावित है. खर्च के वास्तविक आंकड़ों की जानकारी ट्रेजरी से निकासी की प्रक्रिया पूरी होने और विस्तृत ब्योरा आने के बाद मिलेगा.

सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने 30 मार्च 2024 को 1182 आवंटन आदेश जारी किया. इसमें 2806.49 करोड़ रुपये का राशि निहित थी. वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन सरकार द्वारा 450 आवंटन आदेश जारी किये जाने की सूचना है. सरकारी सूत्रों के अनुसार, विकास योजनाओं के लिए निर्धारित राशि में जनवरी तक 44,456.65 करोड़ रुपये खर्च करने में कामयाबी मिली थी. विकास योजनाओं पर खर्च की समीक्षा के बाद सरकार ने खर्च में तेजी लायी. इससे वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन तक विकास योजनाओं के लिए निर्धारित राशि में से 85 प्रतिशत से अधिक राशि खर्च करने का अनुमान है. साथ ही विकास योजनाओं के लिए निर्धारित राशि में से करीब 10 हजार करोड़ से अधिक राशि सरेंडर होने का अनुमान है.

राज्य सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए 116418.00 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया था. इस राशि में से 70,973.00 करोड़ रुपये का प्रावधान विकास योजनाओं के लिए किया गया था. बाद में सरकार ने बजट और योजना आकार में संशोधन कर उसे बढ़ा दिया. सरकार ने कुल बजट का आकार 1,16,418.00 करोड़ रुपये से बढ़ा कर 1,20,518.36 करोड़ कर दिया. साथ ही विकास योजनाओं के लिए निर्धारित 70,973.00 करोड़ रुपये की राशि को बढ़ा कर 73,528.53 करोड़ रुपये कर दिया.

सर्वर रहा डाउन, देर शाम तक आती रही सरेंडर रिपोर्ट

वित्त विभाग का सर्वर डाउन रहने के कारण देर शाम तक सरेंडर रिपोर्ट आती रही. इससे सभी विभाग के कर्मचारी और अधिकारी परेशान रहे. रिपोर्ट अपडेट भी नहीं हो पा रहा था. उन्होंने बताया कि एक साथ सभी विभागों द्वारा रविवार को सर्वर पर काम किया जा रहा था. इससे सर्वर पर भार पड़ा, जिससे नेट स्लो हो गया था. वहीं इस दौरान बिजली भी कटी रही. इसका भी असर कामकाज पर पड़ा. ऐसे में सात बजे तक सारे विभाग में लेखा-बजट शाखा काम करता रहा. विभागों की ओर से भी प्रमंडलों की ओर से आने वाले वास्तविक सरेंडर रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा था.

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