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September 17, 2026

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गोपाल मैदान में गूंजे मांदर-नगाड़े, राष्ट्रीय मागे महोत्सव में झूमे संस्कृति के रंग

जमशेदपुर : बिष्टुपुर स्थित गोपाल मैदान में शुक्रवार को देशभर के विभिन्न राज्यों से आये आदिवासी समुदाय के लोग अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को साकार करते नजर आये. रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे आदिवासी कलाकारों ने मांदर और नगाड़ों की थाप पर नृत्य प्रस्तुत किया. यह नृत्य और संगीत केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से वे प्रकृति के प्रति प्रेम, आपसी एकता और संस्कृति की अखंडता का संदेश दे रहे थे. हर थाप, हर लय में जल, जंगल, जमीन और आदिवासियत के अस्तित्व को बचाने की गूंज थी. यह आयोजन जोहार ट्रस्ट और आदिवासी हो समाज महासभा पूर्वी सिंहभूम द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय मागे महोत्सव का हिस्सा था, जिसने पूरे क्षेत्र को उत्सव के रंग में रंग दिया. नृत्य के दौरान कलाकारों की मुद्राएं और भाव-भंगिमाएं इतनी आकर्षक थीं कि दर्शक भी मंत्रमुग्ध होकर ताल मिलाने लगे।

आदिवासी समाज का तेजी से हो रहा धर्म परिवर्तन, इस पर रोक लगाने की जरूरत : चंपाई सोरेन

राष्ट्रीय मागे महोत्सव पर शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि राज्यसभा सांसद प्रदीप वर्मा, जुगसलाई तोरोप परगना दशमत हांसदा, माझी बाबा सुखराम किस्कू, सोनाराम बोदरा, माेगदा दिग्गी व रामदास टुडू शामिल हुए. मौके पर चंपाई सोरेन ने कहा कि झारखंड में तेजी से आदिवासियों को बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है. स्वशासन व्यवस्था के प्रमुख, समाज के अगुवा व बुद्धिजीवी इस पर कड़ा कदम उठावें और इस पर अविलंब रोक लगावें, अन्यथा आदिवासी समाज पर अस्तित्व का खतरा मंडराने लगेगा. वहीं दूसरी ओर संताल परगना क्षेत्र में बांग्लादेशी घुसपैठिए आदिवासी महिलाओं से शादी करके उनकी जमीन पर कब्जा कर रखे हुए हैं, इसलिए जो भी धर्म परिवर्तन कर रहे हैं या गैर आदिवासी से शादी कर रहे हैं, उनको आरक्षण का लाभ बिलकुल नहीं मिलना चाहिए.

उन्होंने कहा कि आदिवासी स्वशासन व्यवस्था बहुत ही मजबूत व सशक्त व्यवस्था है. इस पर समाज के तमाम लोगों को आस्था रखना चाहिए. साथ अपने समाज को आगे बढ़ाने में अपनी सक्रिय भूमिका को अदा करना चाहिए. बिरसा मुंडा, पोटो हो, ताना भगत, बाबा तिलका माझी, सिदो-कान्हू आदि महापुरुषों ने जल, जंगल व जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष किया और समाज के अस्तित्व को भी बचाने का काम किया, लेकिन वर्तमान समय में जल, जंगल व जमीन को लूटने का काम किया जा रहा है. इस पर तमाम आदिवासियों को फिर से एकजुट होकर जल, जंगल व जमीन पर बुरी नजर रखने वालों के खिलाफ हूल करने की जरूरत है।

अखड़ा मागे सुसुन व मेगा आर्ट फेस्ट आज

शनिवार को अखड़ा मागे सुसुन पारंपरिक नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन होगा. इसमें देशभर से आयीं सर्वश्रेष्ठ नृत्य मंडलियां अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी. विजेता मंडली को 81 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया जायेगा. इसके साथ ही स्कूल और कॉलेज के 2000 से अधिक छात्र-छात्राएं मेगा आर्ट फेस्ट में अपनी कला का जादू बिखेरेंगे. इस रंगारंग प्रतियोगिता में विजेता प्रतिभागियों को एक लाख रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया जायेगा. यह आयोजन न सिर्फ कला और संस्कृति को बढ़ावा देगा, बल्कि युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने और अपनी जड़ों से जुड़ने का भी अवसर देगा।

पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल पर उमड़ी भीड़

जमशेदपुर के राष्ट्रीय मागे महोत्सव में इस बार 200 से अधिक स्टॉल लगाये गये हैं, जहां आदिवासी व्यंजन, परिधान, पुस्तकें, कला एवं शिल्प, फर्नीचर, डेकोरेशन आइटम, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, कार एवं बाइक जैसी विविध वस्तुएं प्रदर्शित की गयी हैं. महोत्सव में आदिवासी पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉलों पर खासा उत्साह देखा गया.जिलु खिचड़ी, जिलु लेटो, जिलु पीठा, रोस्टेड फिश, डुसका और गुड़पीठा जैसे विशेष व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए खरीदारों की भीड़ उमड़ पड़ी. महोत्सव में पहुंचे लोगों ने जहां सांस्कृतिक झलकियों का आनंद लिया, वहीं पारंपरिक पकवानों का स्वाद भी चखा. पूरे आयोजन स्थल पर संस्कृति, स्वाद और परंपरा का संगम देखने को मिला।

इन दलों ने नृत्य किया प्रस्तुत

हो ट्रेडिशनल डांस क्रू हरिगुटू, चाईबासा-पदुगल हो हयम ओल पढ़ावसुसुनदुरंइनितुडंमोडो तुईबर, चाईबासा-आदिवासी कला एंव संस्कृति भवन, सोनुवा-ऑल इंडिया हो समाज, डेबरा, पश्चिम बंगाल-चिरगालेनमे हो समाज आदिवासी, चकड़ी, ओडिशा-आदिवासी हो समाज, हेसा हातु, सरायकेला-खरसावां-सिदा होरा सुसुनअखड़ामरसाल बड़ेडीह, ओडिशा-एभेन मार्शल क्लब राधानगर, ओडिशा-नेशन न्यू ब्वॉयज क्लब बालियाडिपा, ओडिशा-दमा दुमंग छोलागोड़ा

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