ईरान में तख्तापलट की आहट: IRGC के पास देश की कमान, विदेश मंत्री अराघची साइडलाइन; अब क्या करेगा अमेरिका?
ईरान की सत्ता पर अब IRGC का प्रभावी नियंत्रण ईरान के भीतर मोजतबा खामेनेई और IRGC कमांडर अहमद वाहिदी की बढ़ती सक्रियता ने देश के उदारवादी नेताओं की पकड़ ढीली कर दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते सामरिक तनाव और अमेरिका के साथ बातचीत के विफल होने से खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की आशंकाएं गहरा गई हैं।

सेना के हाथों में देश की कमान विदेशी विश्लेषकों और रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की कट्टरपंथी सेना ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने अब कूटनीतिक और सैन्य निर्णयों पर पूर्ण नियंत्रण कर लिया है। मेजर जनरल अहमद वाहिदी और उनके करीबियों के हाथों में कमान आने के बाद से ईरान ने अमेरिका के साथ शांति वार्ता से दूरी बना ली है, जिससे समुद्री व्यापारिक मार्गों पर तनाव चरम पर है।
उदारवादी नेताओं को किया गया किनारे वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक ‘इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर’ (ISW) का दावा है कि इस शक्ति परिवर्तन के कारण विदेश मंत्री अब्बास अराघची जैसे नरमपंथी नेताओं का प्रभाव खत्म हो गया है। अराघची ने पूर्व में अमेरिका के साथ बातचीत कर समुद्री मार्ग खोलने के संकेत दिए थे, जिसे IRGC ने सिरे से खारिज कर दिया। सेना का रुख स्पष्ट है कि जब तक बंदरगाहों की घेराबंदी नहीं हटती, तब तक कोई रियायत नहीं दी जाएगी।
वाहिदी और जोलघाद्र की मजबूत पकड़ अहमद वाहिदी को सुरक्षा परिषद के सचिव मोहम्मद बगेर जोलघाद्र का कड़ा समर्थन मिल रहा है। इन दोनों ने मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। हाल के दिनों में पारंपरिक सेना को हुए नुकसान के बाद अब IRGC की छोटी और घातक नावें वहां तैनात की गई हैं, जिन्होंने हाल ही में कई विदेशी जहाजों को निशाना बनाया है।
डिप्लोमेसी में भी सेना का दखल कूटनीति के मोर्चे पर भी अब सेना का हस्तक्षेप बढ़ गया है। जोलघाद्र को आधिकारिक बातचीत के दल में इसलिए शामिल किया गया है ताकि वे सुनिश्चित कर सकें कि कोई भी फैसला मोजतबा खामेनेई के निर्देशों के विरुद्ध न हो। अराघची पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने ‘एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस’ के प्रति नरम रुख अपनाया, जिसके बाद उनकी पूरी टीम को वापस तेहरान बुला लिया गया।
मोजतबा खामेनेई और वाहिदी के पास अंतिम शक्ति ताजा हालात बताते हैं कि ईरान में सभी महत्वपूर्ण निर्णय अहमद वाहिदी और मोजतबा खामेनेई द्वारा लिए जा रहे हैं। हालांकि मोजतबा चोटिल होने के कारण सार्वजनिक रूप से कम दिखाई दे रहे हैं, लेकिन सत्ता पर उनकी पकड़ बनी हुई है। अराघची और गालिबफ जैसे नेताओं के पास अब नाममात्र की शक्तियां बची हैं, जिससे पश्चिमी देशों के साथ भविष्य में किसी सार्थक समझौते की उम्मीद कम नजर आ रही है।
क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल इन घटनाक्रमों ने उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं जिनमें कहा गया था कि शीर्ष नेतृत्व में बदलाव के बाद ईरान के रुख में नरमी आएगी। फिलहाल क्षेत्र में एक अस्थिर युद्धविराम की स्थिति है, लेकिन IRGC के आक्रामक रवैये को देखते हुए शांति की संभावनाएं धूमिल होती दिख रही हैं।
