राम मंदिर के बाद अब बद्रीनाथ धाम में चढ़ावा चोरी का आरोप, जांच के लिए कमेटी गठित; PA सस्पेंड
Badrinath Temple Donation Row: अयोध्या स्थित राम मंदिर के बाद अब उत्तराखंड के पावन चारधामों में शामिल सुप्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम भी सुर्खियों में है। यहाँ मंदिर में मिलने वाले दान और चढ़ावे में बड़े पैमाने पर वित्तीय हेराफेरी और अनियमितताओं के आरोप लगे हैं, जिससे मामला पूरी तरह से गरमा गया है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए इसकी गहनता से पड़ताल करने के आदेश दिए हैं। सीएम के निर्देश पर इस पूरे प्रकरण की सघन जांच के लिए एक तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच दल तैयार किया गया है। गढ़वाल मंडल के कमिश्नर आनंद स्वरूप को इस विशेष जांच समिति की कमान सौंपी गई है।
पीए सस्पेंड, एफआईआर दर्ज
इस मामले में वित्तीय शुचिता और पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) द्वारा त्वरित और कड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। समिति के अध्यक्ष (चेयरमैन) के कार्यालय में कार्यरत निजी सहायक (PA) प्रमोद नौटियाल को मामले में संलिप्तता के संदेह में तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही, कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए आरोपी पीए के विरुद्ध पुलिस में प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज करा दी गई है।
तीन सदस्यीय समिति करेगी जांच
मामले की तह तक जाने के लिए बनाई गई इस उच्च स्तरीय जांच समिति की कमान गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरूप के हाथों में होगी। उनके अलावा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के प्रबंध निदेशक संदीप तिवारी तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक कार्यालय में कार्यरत वित्त निदेशक जगत सिंह चौहान को इस समिति के सदस्यों के रूप में शामिल किया गया है।
इस जांच दल को यह विशेष अधिकार दिया गया है कि वे आवश्यकतानुसार किसी भी प्रशासनिक अधिकारी, वित्तीय विशेषज्ञ या संबंधित व्यक्ति की मदद अथवा सलाह ले सकते हैं। यह समिति न केवल गबन के आरोपों की जांच करेगी, बल्कि भविष्य में मंदिर की दान प्रबंधन प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के लिए ठोस सुझाव भी सरकार को सौंपेगी।
बद्रीनाथ में चढ़ावे के कथित गबन की गहन जांच हो : मायावती
धार्मिक स्थलों पर वित्तीय गड़बड़ियों के इन मामलों पर अब राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आने लगी हैं। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अयोध्या के राम मंदिर और उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे की कथित चोरी और धांधली के मामलों की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की पुरजोर वकालत की है।
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए लिखा कि अयोध्या के बाद अब बद्रीनाथ धाम में दान की रकम में हेराफेरी की खबरें चिंताजनक हैं। उन्होंने मांग की कि इन दोनों प्रतिष्ठित धार्मिक केंद्रों के ट्रस्ट से जुड़े मुख्य प्रबंधकों की भूमिका की भी बारीकी से जांच होनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो भविष्य में शीर्ष पदों पर बैठे लोग भी व्यवस्था का गलत फायदा उठा सकते हैं।
उन्होंने आगे लिखा कि सार्वजनिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि निचले स्तर पर हुए इस भ्रष्टाचार के पीछे या तो उच्च प्रबंधकों की मौन सहमति रही है या फिर उनकी बड़ी लापरवाही। इसलिए, इस पूरे मामले का दूध का दूध और पानी का पानी होना बेहद जरूरी है। सरकार और विशेष जांच दल (SIT) को इस पर विशेष ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
