गौड़ किरण – स्मारिका पर प्रकाशित “मानव जीवन में शंख का महत्व” लेख को पाठकों ने खूब सराहा

सरायकेला जिले के राजनगर प्रखण्ड अन्तर्गत बड़ा सिजुलता में आयोजित गौड़ सेवा संघ के 34 वां संकल्प दिवस समारोह पर “गौड़ किरण – स्मारिका” का विमोचन हुआ । इस पत्रिका में “मानव जीवन में शंख का महत्व ” शीर्षक लेख प्रकाशित हुई है, जिसे पाठकों द्वारा खूब सराहा गया। ज्ञात हो कि इसके लेखक सरायकेला प्रखण्ड के मुरुप निवासी हेमसागर प्रधान है।

उन्होंने “मानव जीवन में शंख का महत्व” लेख के माध्यम से बताया है कि शंख मुख्य रूप से एक समुद्री जीव का ढांचा होता है। पौराणिक रूप से शंख की उत्पत्ति समुद्र से मानी जाती है। यह एक प्राकृतिक हवा वाद्य यंत्र है । शंख मूल रूप से हिंदू संस्कृति में धार्मिक महत्व रखता है। हिंदू धर्म के अनुयायी इनके पसंदीदा भगवान और देवी का आह्वान करने के लिए शंख का उपयोग करते हैं। शंख को मंगल कार्य और धार्मिक उत्सवों में बजाना शुभ माना जाता है। शंख को किसी समय काम की शुरुआत एवं समाप्ति की घोषणा के लिए पवित्र माध्यम माना जाता है। भगवान श्री कृष्ण ने अपने शंखनाद से महाभारत युद्ध के समाप्ति की घोषणा की थी ।

विज्ञान के अनुसार शंख की ध्वनि महत्वपूर्ण होती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि शंख ध्वनि से वातावरण का परिस्कार होता है। इसकी ध्वनि के प्रसार क्षेत्र तक सभी कीटाणुओं का नाश हो जाता है। नियमित रूप से शंख बजाने से हृदय रोग और फेफड़ों का बीमारियों होने की संभावना कम हो जाती है। इन सारी बातों को ध्यान में रखते हुए हमारे गौड़ समाज के बुद्धिजीवी लोगों ने काफी सोच विचार करके हमारे गौड़ समाज के झंडे में शंख चित्र को दर्शाया गया है। अतःहमें शंख की महत्व को समझना है और इसे अपने जीवन में अमल करना चाहिए।
