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September 17, 2026

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खरसवां:बाघरायडीह में नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा पूर्णाहुति के साथ हुआ संपन्न “भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता अनुकरणीय है”- रामानाथ होता

खरसवां प्रखण्ड अन्तर्गत बाघरायडीह में चल रही नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ आज पूर्णाहुति के साथ संपन्न हुआ। ज्ञान यज्ञ के आखरी दिन की कथा में पंडित रामा रामानाथ होता महाराज ने विभिन्न प्रसंगों पर प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि नौवें दिन कृष्ण के अलग- अलग लीलाओं का वर्णन किया गया। मां देवकी के कहने पर छह पुत्रों को वापस लाकर मा देवकी को वापस देना ,सुभद्रा हरण का आख्यान कहना एवं सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कथावाचक रामा रामानाथ होता ने बताया कि मित्रता कैसे निभाई जाए, यह भगवान श्री कृष्ण सुदामा जी से समझ सकते हैं।

उन्होंने कहा कि सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र (सखा) से सुदामा मिलने के लिए द्वारिका पहुंचे। उन्होंने कहा कि सुदामा द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और महल की ओर बढ़ने लगे द्वार पर द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। तब उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं। इस पर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है।अपना नाम सुदामा बता रहा है। जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा का नाम सुना प्रभु सुदामा सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे सामने सुदामा सखा को देखकर उन्होंने उसे अपने सीने से लगा लिया। सुदामा ने भी कन्हैया कन्हैया कहकर उन्हें गले लगाया और सुदामा को अपने महल में ले गए ओर उनका अभिनंदन किया।

इस आश्य को देखकर श्रोता भाव विभोर हो गए। श्रद्धालुओं ने सुदामा और कृष्ण की झांकी पर फूलों की वर्षा की । इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर कमेटी द्वारा भंडारा का आयोजन कर श्रद्धालुओं को खिचड़ी खिलाया गया। मौके पर कथावाचक पं योगेश्वर महापात्र, राधाबल्लभ प्रधान,अजीत प्रधान, बसंत प्रधान, कृष्ण प्रधान, नागेश्वर प्रधान, दिनेश प्रधान, पंचु गोपाल महतो , हेमसागर प्रधान सहित सैकड़ों गणमान्य लोग मौजूद थे। उक्त धार्मिक अनुष्ठान को सफल बनाने में श्रीमद्धभागवत कथा प्रचारक समिति बाघरायडीह के मुख्य संजोजक मनु प्रधान, गणेश प्रधान, सागर प्रधान, अजीत सरदार, वैद्यनाथ प्रधान,सरंगो प्रधान, सफल,गोपाल, सीता,अनंत, रूद्र मुरलीधर, डाकेश्वर, भ्रमर, अप्रजीत, दुश्मन, जवाहरलाल, मधुसुदन, राकेश, रामरतन, तपन, लखिन्द् समेत समस्त ग्रामवासियों का सहयोग सारानीय रहा।

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