नीट री-एग्जाम फर्जीवाड़ा मामले में नया खुलासा, क्या है कोड 220? पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी EOU
नीट (NEET UG) की दोबारा आयोजित हुई परीक्षा में लखीसराय के भीतर फर्जी परीक्षार्थियों (सॉल्वरों) को बैठाकर धांधली करने के प्रयास मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने अपनी तफ्तीश तेज कर दी है। लखीसराय के तीन प्रमुख परीक्षा केंद्रों—केंद्रीय विद्यालय खगौर, केआरके उच्च विद्यालय और उच्च विद्यालय हसनपुर में वास्तविक अभ्यर्थियों के स्थान पर सॉल्वरों को परीक्षा में बैठाने का खेल रचा गया था। शुरुआती जांच में जांच एजेंसी के हाथ कई चौंकाने वाले सुराग लगे हैं।
बायोमीट्रिक मशीन की मदद से ऐसे सॉल्वरों ने ली एंट्री
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, परीक्षा केंद्रों पर कुल छह बायोमीट्रिक मशीनें उपलब्ध कराई गई थीं। इनमें से दो मशीनों को तकनीकी खराबी या निष्क्रिय बताकर जानबूझकर अलग रख दिया गया। इसके बाद योजना के तहत सबसे पहले इन दोनों मशीनों पर मूल (असली) अभ्यर्थियों को बुलाकर उनकी उपस्थिति दर्ज कराई गई। हाजिरी पूरी होते ही उन्हें चुपके से परीक्षा केंद्र से बाहर भेज दिया गया।
जैसे ही मूल परीक्षार्थी केंद्र से बाहर निकले, उनकी जगह सॉल्वर गिरोह के सदस्यों की एंट्री कराई गई। परीक्षा केंद्र के भीतर प्रवेश पाने के लिए इन सॉल्वरों को एक खास “कोड 220” बताना था। बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन का काम संभाल रहे कर्मियों को इस गुप्त कोड की जानकारी पहले से ही दे दी गई थी।
इस फर्जीवाड़े को पुख्ता करने के लिए सॉल्वरों के एडमिट कार्ड पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का नकली होलोग्राम भी चिपकाया गया था, ताकि केंद्र के भीतर किसी को भी शक न हो। इन एडमिट कार्ड्स को बिल्कुल आखिरी वक्त पर अपडेट किया गया था। फिलहाल जांच एजेंसी ने एडमिट कार्ड पर लगी तस्वीरों की मदद से सभी सॉल्वरों के चेहरों का मिलान कर लिया है। ईओयू के सूत्रों का कहना है कि यह अभी शुरुआती तफ्तीश है, जिसमें सॉल्वर गैंग के काम करने के तौर-तरीकों को समझा जा रहा है।
तीनों एग्जाम सेंटर्स के सीसीटीवी कैमरे की होगी जांच
ईओयू के अधिकारियों के अनुसार, अब अगला कदम तीनों परीक्षा केंद्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को खंगालना होगा। सीसीटीवी की बारीकी से जांच करने पर यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि किस समय किसने केंद्र में प्रवेश किया और कौन कब बाहर निकला।
इस बड़े रैकेट और इसके पूरे नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए ईओयू की मुस्तैदी बढ़ गई है। मामले की गहराई से जांच के लिए डीआईजी (DIG) की देखरेख में एक 12 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। इस एसआईटी ने अब पूरे मामले की कमान अपने हाथों में ले ली है।
स्कॉलर, डमी छात्रों समेत 30 को पुलिस ने किया है गिरफ्तार
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नीट की इस पुनर्परीक्षा में नकली और डमी अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठाने की यह पूरी साजिश लखीसराय में रची गई थी। मामले का भंडाफोड़ होने के बाद लखीसराय पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 10 सॉल्वरों (स्कॉलर्स और डमी अभ्यर्थियों) को रंगे हाथों दबोचा था। इसके अलावा, इस जालसाजी में उनका साथ देने वाले 17 बायोमीट्रिक कर्मियों और एक मूल परीक्षार्थी को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस की जांच में इस रैकेट में शामिल दो अन्य मददगारों की भूमिका भी सामने आई है।
