सरायकेला-खरसावां के हरिभंजा स्थित प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में प्रभु जगन्नाथ की स्नान यात्रा आयोजित
सरायकेला-खरसावां के हरिभंजा स्थित प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में प्रभु जगन्नाथ की स्नान यात्रा( देव स्नान पूर्णिमा) आयोजित किया गया मंदिरों में पुरोहित द्वारा प्रभु जगन्नाथ बलभद्र बहन सुभद्रा प्रतिमा को स्नान मंडप तक लाया गया विशेष विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चना हुआ।

परंपरा के अनुसार प्रभु जगन्नाथ बड़े भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा की पूजा कर उन्हें 108 कलश जल से स्नान किया गया। मान्यता है कि स्नान पूर्णिमा के आज के दिन अत्यधिक स्नान से प्रभु जगन्नाथ बीमार हो जाते हैं इसके बाद एक पखवाड़े तक यानी 15 दिनों तक उनका उपचार अणसर गृह में क्या जायेगा। 15 दिनों की अवधि में किसी भी भक्तों को प्रभु जगन्नाथ का दर्शन नहीं होता है स्नान पूर्णिमा के 15 दिन के बाद 7 जुलाई को सुबह में नेत्र उत्सव सह यौवन रूप के दर्शन होगी फिर इसी दिन शाम को प्रभु जगन्नाथ , बलभद्र, बहन सुभद्रा रथ पर सवार होकर मौसी बाडी, गुडिचा मंदिर के लिए रवाना होंगे।

खरसावां के राजपुरोहित अम्मुजाख आचार्य ने बताया कि साल भर भगवान की गर्भ ग्रह में ही स्नान करते हैं लेकिन इस स्नान की प्रक्रिया अलग है। इसमें मूर्ति के सामने बड़े आइने रखते हैं फिर आइनों पर दिख रही भगवान की छवि पर धीरे-धीरे जल डाला जाता है लेकिन देव स्नान पूर्णिमा के लिए मंदिर प्रांगण में मंच में ही स्नान किया जाता है। भगवान के शरीर पर कोई तरह के सूती वस्त्र लपेटते है। ताकि उनकी काष्ठ काया पानी से बची रहे। महाप्रभु जगन्नाथ को 35, बलभद्र जी को 33, सुभद्रा जी को 22, मटकी जल से नहलाते है, शेष 18 मटकी सुदर्शन जी पर चढ़ाई जाती है। प्रभु जगन्नाथ मंदिर में भक्तों सुबह से भारी संख्या में उपस्थित थे।
